किस घर में लक्ष्मी जी निवास करना पसंद करती है : अभी जाने

laxmi ji kahan rahti hai

हमारे शास्त्रों में उल्लेख है की स्वयं भगवती लक्ष्मी जी ने किसी वाक्य में यह कहा था की श्री कृष्णचन्द्र की महारानी रुक्मणि देवी तथा देवराज इंद्र को बताना की मुझे मेरे निवास स्थान से धाता, विधाता कोई भी नहीं हटा सकते लेकिन में स्वयं उन घरों को तुरंत छोड़ देती हूं. आइये जानते है लक्ष्मी जी के निवास स्थान के बारे में, घर में लक्ष्मी जी कहां रहती है ?

ऐसी बहुत सी बाते है, अशुभ आदते है जिनके कारण लक्ष्मी जी किसी के घर में निवास नहीं करती, इस तरह धीरे-धीरे उस घर में धन की कमी होने लगती है और ऐसे भी कई लोग है जो की सभी तरह के उपाय करते है लेकिन इन बताई जा रही बातों पर ध्यान नहीं देते.

जिससे लाख उपाय करने पर भी उनके घर में लक्ष्मी जी वास नहीं करती. तो आइये जानते है की लक्ष्मी जी किन घर में रहना पसंद करती है और किन घरो को वह तुरंत त्याग देती है. यह बाते स्वयं मां लक्ष्मी द्वारा शास्त्रों में बताई है है जो की इस प्रकार है.

Lakshmi Ji Ka Niwas Sthan Kaha Hota Hai

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घर में लक्ष्मी जी कहा रहती है निवास स्थान

  • जिस परिवार में विवाह के बाद पुत्र अपने वृद्ध माता पिता का पालन पोषण नहीं करते और उनका अनादर करते है में उस घर को त्याग देती हूं.

जिस घर में बहु सास ससुर आदि पूज्यजनो का कहना न मान कर मनमानी करती है. गृह स्वामिनी बनकर भी स्वयं घर का काम न कर के सास से घर का काम करवाती है.

अपने स्वामी पर तथा घर के अन्य पूज्य सम्बन्धियों पर शासन चलाती है. उन्हें उनका नाम ले लेकर पुकारती है. ऐसे घर को छोड़ कर में दूर चली जाती हूं.

  • जिस परिवार में छोटे अपने से बड़ो का सम्मान नहीं करते. अपने माता पिता वृद्ध, आचार्य और अतिथि या गुरु का सम्मान नहीं करते ऐसे घर से में विदा हो जाती हूं.
  • जिस घर में पिता अपनी दूसरी पत्नी के कहने पर क्रोध के आवेश में अपनी पहली पत्नी के किसी पुत्र को उसका उचित भाग न देकर उसे अलग कर देता है और उसे भोग से वंचिर कर देता है. उस घर में निवास कभी नहीं करती.
  • जो कन्या-विक्रय, आत्म-विक्रय, वेद-विक्रय, विद्द्या-विक्रय तथा देव-पूजा विक्रय करता है. उस घर से में तुरंत चली जाती हूं.

जहां गृहणी, मन, वाणी और कर्म से शुचिता पवित्रता का पालन नहीं करते है. धर्म की मर्यादा तोड़ कर मन माना आचरण कर जूते पहन कर भोजन बनाया जाता है. अभक्ष्य भोजन मांस अंडा आदि परोसा जाता है.

उस घर में में कभी नहीं ठहरती. जिस घर में भोजन ढंका हुआ नहीं रहता, चूहे और बिल्ली आदि खाने पिने की वस्तुए को झूठा करते हो, इधर उधर सामान बिखरा रहता है ऐसे घर को में त्याग देती हूं.

  • जिस घर में झूठे मुंह और हाथों से चीजों को छुआ जाता है. दूध आदि को ढंक-कर नहीं रखा जाता वहां में वास नहीं करती.
  • जिस घर में बड़े बूढ़ों और पोष्य वर्ग को भोजन कराये बिना आप अकेले भोजन कर लेते है. अपने लिए उत्तम भोजन तथा अन्य पौष्टिक खाद्द्य पदार्थ छोटे-छोटे बालकों के देखते ही स्वयं अकेले ग्रहण कर लेते है या छिपा लेते है ऐसे घर से में चली जाती हूं.
  • जिस घर में सूर्योदय होने के बाद बिस्तर से उठते हैं और सूर्योदय होने के बाद मल त्याग करते हैं सूर्य की की और मुंह करके लघु शंका और पेशाब करते हैं. उस घर में मेरा वास नहीं होता.
  • जिस घर में पुरुष स्त्रियों का वेश धारण करती हैं और स्त्रियां पुरुषों का वेश धारण किए हुए फिरती हैं मैं वहां से जल्द ही चली जाती जाती हूं.

  • जिस घर में घर की दीवार गिर जाने पर भी उसे तुरंत यानी जल्द ही नहीं बनवाया जाता तो उस घर को मैं छोड़ कर कहीं और चली जाती हूं.
  • जिस घर में पशुओं को आंगन में बांधकर उनको दाना, घास, भूसा और पानी आदि समय पर नहीं दिया जाता वहां पर मेरा वास नहीं होता है.
  • जिस परिवार में फैशन के नशे में आकर स्त्रियां अशुभ सूचक अपने बाल कटवा कर तथा काले और सफेद कपड़े आदि से अशुभ वेश धारण करती है मैं वहां नहीं ठहरती हूं.
  • जिस घर में ऋण लेकर चुकाया नहीं जाता तथा ऋण देकर एक-एक के तीन, चार चार लेने पर भी खाता बंद नहीं किया जाता, ऐसे स्थान से मैं चली जाती हूं.
  • जिस घर में बर्तन सुव्यवस्थित रूप में नहीं रखे जाते और रात का भोजन करने के बाद झूठे बर्तनों को मांज कर साफ करके नहीं रखा जाता और झूठे और अशुद्ध बर्तन रात भर रसोई में पड़े रहते हैं, ऐसे घरों को मैं छोड़ कर चली जाती हूं.

  • जिस घर में महिलाएं सोते समय अपने गहने संभाल कर नहीं रखती और इधर उधर कहीं भी रख देती है उस घर में मेरा वास नहीं होता.
  • जिस घर में रात में दही और सत्तू खाते हैं मैं उस घर को तुरंत छोड़ देती हूं.
  • जिस घर में धर्म मर्यादा का उल्लंघन कर मन माना आचरण किया जाता है, वहां मेरा वास नहीं होता.
  • जिस घर में टूटे बर्तन ,टूटी खाट, फटे आसन और वस्त्र तथा बर्तन इधर-उधर बिखरे रहते हैं वहां मेरी बड़ी बहन दरिद्रता का वास होता है.
  • जिस घर में चतुरता, सरलता, उत्साह, परम सौहार्द, क्षमा, सत्य, दान, तप, पवित्रता, नम्रता, दया, कोमल वाणी तथा मित्रों से प्रगाढ़ प्रेम आदि सब सद्गुण नहीं होते मैं वहां कभी वास नहीं करती.

  • जो भिक्षु को भिक्षा अतिथि को भोजन और देवताओ को निवेदन किए बिना भोजन कर लेता है वह मेरी बड़ी बहन दरिद्रता का निवास होता है.
  • मेरी ही विभूति गृह लक्ष्मी का जहां तिरस्कार किया जाता है, दू-व्यवहार किया जाता है अथवा वह मारी पीटी जाती है ऐसे घर में मेरा वास कैसे हो सकता है.
  • जिस परिवार में निद्रा, आलस्य, अप्रसन्नता, दोष, दृष्टि, विवेक, संतोष, निषाद और कामना आदि दोष रहते हैं वहां में वास नहीं करती.
  • जिस घर में स्त्रियां चाकू, हँसिया, संदूक, आटा, कांसे के बर्तन खाद पदार्थ द्रव्यमान आदि वस्तुओं को संभाल कर नहीं रखती उस घर को भी मैं छोड़ कर चली जाती हूं.
  • जिस घर में दिन-अनाथ, वृद्ध दुर्बल रोगी बालक और स्त्रियों पर दया नहीं की जाती यहां भी मैं वास नहीं करती और ना ही ठहरती हूं.
  • जिस घर को रोजाना साफ नहीं किया जाता वहां मेरी बहन दरिद्रता रहने लगती है. मैं उस घर को छोड़ देती हूं.
  • जिस घर में पित्र श्राद्ध नहीं किया जाता वहां भी मेरा वास नहीं होता है.

जो दिन में अपनी पत्नी से मैथुन करता है, गिले पांव नंगा होकर सोता है, सूर्योदय के समय और शाम के समय सोता है, नहाने के बाद सूर्य को अर्ध्य नहीं देता है मैं उस घर में वास नहीं करती हूं, वहां से चली जाती हूं मेरे जाने पर वहां से आशा, श्रद्धा, शांति, समृद्धि यह सब चली जाती है और इनके जाने से उस घर में दरिद्रता, कलह, अशांति, असंतोष और कई तरह की विपत्तियां आने लगती है.

  • इसके बाद भगवती लक्ष्मी जी कहती है, भगवान् नारायण द्वारा श्री ब्रह्मा जी और अन्य देवताओ को बताना की वरदा, पुत्रदा, धनदा, सुखदा, मोक्षप्रद, सम्पूर्ण मंगलो को भी मंगल प्रदान करने वाली मेरी प्राण प्रिय लक्ष्मी उस स्थान, घर और परिवार में निवास नहीं करती है.
  • जहां शंख की ध्वनि नहीं होती है, जहां मेरी परम प्रिय तुलसी का निवास नहीं होता है, जहां ब्राह्मणों को भोजन नहीं कराया जाता है, जिस घर में मेरे भक्तों की निंदा होती है. वहां रहने वाली मां लक्ष्मी के मन में अपार क्रोध उत्पन्न हो जाता है और वह उस स्थान को छोड़कर चल देती है.

  • जिस घर में लक्ष्मी नारायण की उपासना नहीं होती है, जिस घर में एकादशी और जन्माष्टमी आदि शुभ व्रतों पर अन्न भक्षण होता है, उन व्यक्तियों के घर से लक्ष्मी चली जाती है.
  • जो मेरे नाम का और अपनी कन्या या अपनी बहन का विक्रय करता है, जहां अतिथि भोजन नहीं पाता है उस घर को मेरी लक्ष्मी जी तुरंत त्याग कर चली जाती है.

जो कायर व्यक्तियों का अन्न खाता है, अपने नाख़ून से पृथ्वी कुरेदता रहता है, जो व्यक्ति सुबह होते वक्त और शाम होते वक्त भोजन करता है या इस समय पर सोता है, दिन में सोता है और मैथुन करता है, जो दुराचारी होता है ऐसे मनुष्य के घर को भी लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है.

  • जो व्यक्ति भीगे पैर और नंगा होकर सोता है, नग्न होकर स्नान करता है उसके घर में लक्ष्मी का वास नहीं होता है.
  • जो सिर पर तेल लगा कर उसी से दूसरे अंगों को स्पर्श करता है, अपने सिर का तेल दूसरे को लगाता है और अपनी गोद में बाजा लेकर उसे बचाता है. उस घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है.

  • जिस घर में शिवलिंग, शालिग्राम, महालक्ष्मी, महासरस्वती और महादुर्गा आदि का रोजाना पूजन नहीं होता है, वहां भी लक्ष्मी का वास नहीं होता है.
  • जिस परिवार में रोजाना प्रभु का भजन कीर्तन नहीं होता वहां महालक्ष्मी कभी नहीं रुकती है.
  • जिस कुटुंब के सदस्य सत्य, दान, तप, शील और धर्म परायण नहीं होते वहां भी लक्ष्मी जी बिलकुल वास नहीं करती है.

तो इस तरह बताई गई बातों का विशेष ध्यान रखे, घर में लक्ष्मी जी का निवास स्थान, laxmi ji ka niwas sthan in Hindi यही होता है, जिस घर में इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाता है, वह दिनों दिन तरक्की करता है और धन की भी कोई कमी नहीं आती.

कई लोग इन बातों पर ध्यान नहीं रखते इसीलिए उनके घर में धन स्थिर नहीं रहता, दरिद्रता आती रहती और वह शांति से जीवनयापन भी नहीं कर पाते. अब आप भी अपनी गलतियों को सुधारे और इन बातों का ध्यान रखे. साथ ही इस वीडियो को सभी तक पहुंचाए ताकि सभी यह जानकारी हासिल करे सके.

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